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Saturday, November 15, 2014

Gulshan Ki faqat-Lyrics & Translation_Ghazal_Jagjit Singh


Lyrics 


Gulshan ki faqt phoolon se nahin kaaton se bhi zeenat hoti hai 
Jeene ke liye is duniya mein gam ki bhi zaroorat hoti hai 

Ae waaiz-e-naadan karta hai tu ek qayamat ka charcha 
Yahan roz nigahen milti hain yahan roz qayamat hoti hai 

Wo pursish-e-gam ko ayae hain kuch keh na sakoon chup reh na sakoon
Khamosh rahoon to mushkil hai keh doon to shikaayat hoti hai 

Karna hi padega jabt-e-alam peene hi padenge ye aansoo 
Fariyad-o-fugaan se ae naadaan tauheen-e-mohabbat hoti hai 

Jo aake ruke daaman pe "Saba" wo ashq nahin hai paani hai 
Jo ashq na chhalke ankhon se us ashq ki keemat hoti hai 

गुलशन की फ़क़त फूलों से नहीं काटों से भी जीनत होती है, 
जीने के लिए इस दुनिया मे गम की भी ज़रूरत होती है, 

ऐ वाइज़-ऐ-नादान करता है तू एक क़यामत का चर्चा, 
यहाँ रोज़ निगाहें मिलती हैं यहाँ रोज़ क़यामत होती है, 

वो पुर्सिश-ऐ-गम को आये हैं कुछ कह न सकूं चुप रह न सकूं, 
खामोश रहूँ तो मुश्किल है कह दू तो शिकायत होती है, 

करना ही पड़ेगा जब्त-ऐ-आलम पीने ही पड़ेंगे ये आंसू, 
फरियाद-ओ-फुगान से ऐ नादाँ तौहीन-ऐ-मोहब्बत होती है, 

जो आके रुके दामन पे "सबा" वो अश्क नहीं है पानी है, 
जो अश्क न छलके आंखों से उस अश्क की कीमत होती है, 

Lyrics: Saba Afghani 
Music: Jagjit Singh 
Singer: Jagjit Singh 

Translation 

For a garden to be beautiful not only flowers but thorns too are necessary. 
To live life in this world to its full to suffer pain is also necessary. 

O' you naive preacher; you discuss about the final doom's day. 
Here daily eyes lock; here each day is doom's day. 

There she comes inquiring reasons of my woes, utter I can't, remain silent I can't. 
To remain silent is quite difficult, if I speak out then it may sound to be stingy. 

This pain has to be suffered; these tears has to be shed. 
To complain or to plea; O' naive one, to our love shall be an infamy. 

The tears that fall on your lap, says "Saba", are not tears but mere water.
The tear that is never shed from eyes is the tear which is pricey. 

© Translation in English by Deepankar Choudhury.

Translation

বাগান এর সৌন্দর্যর জন্য শুধু ফুল নয় কাঁটারও প্রয়োজন। 
জীবনের জন্য দুনিয়াতে দুখেরও প্রয়োজন।। 

হে সরল নবী তুমি শেষ প্রলয়ের কথা কও। 
হয় দৈনিক চোখাচোখি হয় দৈনিক প্রলয়ের আয়োজন।। 

দুখের কারন জানতে সে আসে, না কইতে পারি, না সইতে পারি। 
মুখ বুঝে থাকা অসমভব, যদি বলি তাহলে শোনাবে অভিযোগের আবেদন।। 

সহ্য করতেই হবে এই বেদন, ঝরাতে হবেই এই অশ্রুজল। 
না করিয়ো নালিশ না করিয়ো আবেদন, তাহলে হবে ভালবাসার সম্মান হনন।। 

কাপড়ে যে অশ্রু ঝরে পড়ে সে অশ্রু নহে শুধুই জল। 
যে অশ্রু ঝরে না কভু, সেই অশ্রুর কে করবে মূল্যায়ন।। 

© Translation in Bengali by Deepankar Choudhury.